News – Article on Philately – Dainik Jagran 30th Nov, 2009

News – Article on Philately – Dainik Jagran

An article on Philately in Delhi Edition of  leading Hindi Newspaper Dainik Jagran has been published in its Edition dated 30 Nov 2009. Our readers will appreciate the efforts being put in to Popularise the hobby among the People of all age groups and all walks of life.

A link is given below for the benefit of our readers.

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=2&edition=2009-11-30&pageno=16

वेबसाइट पर डाक टिकटों की जानकारी
रणविजय सिंह, पश्चिमी दिल्ली दिल्ली में डाक टिकटों के अतीत व वर्तमान की जानकारी वाले लोग विरले ही मिलेंगे। डाक टिकट संग्रहकर्ता ने वेबसाइट बनाई है, जहां विश्व में पहली डाक टिकट कब छपी, देश की स्वतंत्रता से पहले से लेकर आज तक के डाक टिकटों के इतिहास की जानकारी माउस क्लिक करते ही मिल जाती है। यह वेबसाइट पश्चिम विहारवासी विनोद सब्बरवाल ने बनाई है। उन्हें डाक टिकट का संग्रह व जानकारी रखना शौक है। शौक को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने इंडियन स्टांप घर डॉट काम बनाई है। इस साइट पर डाक टिकटों का इतिहास तो दर्ज है ही, देश विदेश में नई डाक टिकट जारी होते ही उसकी पूरी जानकारी भी इस वेबसाइट पर दर्ज हो जाती है। यदि आप यह जानना चाहते हैं कि देश की आजादी के बाद पहला डाक टिकट कब, कहां और किस पर छपी तो माउस क्लिक करते ही यह स्क्रीन पर आपके सामने आ जाता है। तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर छपी इस डाक टिकट की कीमत बढ़कर दस से 12 हजार रुपये हो चुकी है। बकौल विनोद सब्बरवाल डाक टिकट से जुड़ी शायद ही कोई ऐसी जानकारी है, जो इस साइट पर उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन दो-दो घंटे सुबह शाम समय निकालकर वेबसाइट को अपडेट करते हैं। उन्होंने बताया कि हिमालय व अंटार्टिका से संबंधित डाक टिकटों का संग्रह व अध्ययन करना ज्यादा पंसद हैं। इस साइट से 680 लिंक जुडे़ हुए हैं।

West Delhi Philatelic Club – Monthly Meeting Dec 2009

West Delhi Philatelic Club – Monthly Meeting Dec 2009

The next meeting of West Delhi Philatelic Club is scheduled to be held on 06 Dec 2009 at the same venue. All are our well wishers must be aware of our endeavour to move forward and do some constructive and Positive work for the development of Philately. Another article on Internet Philately has been published in the Prestigious newspaper The Hindustan Times. We are sure that all our readers and well wishers have been able to read this article . We are overwhelmed by the number of calls and messages received by the Office Bearers.

Here Is The Link For The Full Coverage:

http://epaper.hindustantimes.com/ArticleImage.aspx?article=22_11_2009_012_003&mode=1

News – Article on Philately – Dainik Jagran

An article on Philately in Delhi Edition of  leading Hindi Newspaper Dainik Jagran has been published in its Edition dated 28 Nov 2009.  Members of West Delhi Philatelic Club  will appreciate the efforts being put in to Popularise the hobby among the People of all age groups and all walks of life.

A link is given below for the benefit of our readers.

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=2&edition=2009-11-28&pageno=20

जुनून से बना डाक टिकटों का अनमोल संग्रह
रणविजय सिंह, पश्चिमी दिल्ली हीरे की पहचान जौहरी ही कर सकता है यह कहावत यू हीं नहीं कही जाती। जिस डाक टिकट का इस्तेमाल करने के बाद कागज का टुकड़ा समझकर लोग फेंक देते हैं। देश के इतिहास, संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने वाले डाक टिकटों को सहेजना लोग उचित नहीं समझते। हकीकत में यह सस्ता होकर भी अनमोल है। यह बात डाक टिकटों का संग्रह करने का शौक रखने वाले राजौरी गार्डन के चार डाक टिकट संग्रहकर्ताओं से बेहतर कोई नहीं बता सकता। उन्होंने सदी पुराने, स्वतंत्रता के दिनों व दशकों पुराने डाक टिकटों का संग्रह किया है। पुराने दिनों में आने व रुपयों में बिकने वाले डाक टिकटों की कीमत हजारों व लाखों में हो चुकी है। डाक टिकटों पर प्रकाशित पुस्तक स्टेनले गिवन भी इस बात की तस्दीक करती है। दरअसल राजौरी गार्डनवासी विनोद सब्बरवाल, एएस बंगा व अन्य दो दोस्तों ने वर्षो पहले डाक टिकट शौकिया तौर पर संग्रह करना शुरू किया। बाद में ये डाक टिकट संग्रहकत्र्ता बन गए। उन्होंने बाकायदा पश्चिमी दिल्ली फिलाटेलिक क्लब बना लिया है। उन्होंने देश की स्वतंत्रता से पहले, स्वतंत्रता के बाद की डाक टिकट संजोकर रखे हैं, जो भारतीय इतिहास के अतीत के पन्नों को झकझोर कर रख देते हैं। जिसे देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तब देश में रहन-सहन कैसी थी, यातायात के साधन क्या थे? देश की आजादी के बाद भारत सरकार ने 30 जनवरी, 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर चार डाक टिकटों का एक सेट जारी किया था। उस वक्त ये टिकट क्रमश: डेढ़ आना, साढ़े तीन आना, 12 आना व दस रुपये में मिलता था। बकौल एस बंगा यह देश का पहला व एक मात्र डाक टिकट है, जो विदेश में छपा। इसे स्विटजरलैंड में छपवाया गया था। उन्होंने बताया कि आज 10 से 12 रुपये में टिकट को खरीदने को अनेक लोग तैयार हैं। बावजूद इसके बापू का यह डाक टिकट नहीं मिल रहा है। यही नहीं, देश स्वतंत्र होने के बाद जारी पहले डाक टिकट जयहिंद, अशोक स्तंभ, तिरंगा झंडा व उड़ान भरते विमान पर स्टांप जारी हुआ था। इस टिकट का भी संग्रह है, जो देश की आजादी की आज भी याद दिलाते हैं। वहीं, डाक टिकट संग्रहकर्ताओं को रोजी रोटी भी दे रहे हैं। पश्चिमी दिल्ली डाक टिकट संग्रह क्लब के अध्यक्ष विनोद सब्बरवाल व एएस बंगा ने बताया कि 1852 में पहला टिकट जारी हुआ था। तब आधा आना में बिकने वाला डाक टिकट की कीमत 50 हजार से लेकर नौ लाख रुपये हो चुकी है। इस अनोखे कार्य के लिए तीन मेडल जीत चुके विनोद सब्बरवाल ने कहा कि जिन डाक टिकटों की छपाई में खामियां होती हैं, उनकी कीमत और ऊंची होती है। यदि खामियां रंगों की हो तो एक टिकट की कीमत पांच लाख रुपये मिल जाता है। डाक टिकट संग्रह करने के शौकीन लोग कटे फटे व बीच से मुड़े हुए टिकट के लिए 40 हजार रुपये तक देने को तैयार रहते हैं क्योंकि इन टिकटों में देश की आत्मा बसती है।

2010 is likely to be Year of International Events like Commonwealth Games , World Cup Football, World Cup Hockey in India in Feb – Mar 2010 and Maybe an International Philatelic Exhibition in Dec 2010 or Jan -Feb 2011. Next meeting shall have lot of things to discuss namely

Plans for 2010

Identification of Thrust Areas

Set Aims for 2010 and Identify Key Result Areas.

– Participation in Philatelic Events

We invite all Philatelists to join us and help us with their valuable and constructive suggestions to make this Club  a force to reckon with in the Philatelic World and among the Philatelists Fraternity. Let’s be better than the Best. We invite all Philatelists  from NCR region and Satellite towns of Delhi to join us. It is a Great Opportunity so- do not miss it


Venue:-M-1, First Floor,

Dewan House, Ajay Enclave,

Near Ajanta Cinema, Subash Nagar Metro Station

Subash Nagar,New Delhi

Date:- 06.12.2009.

Time:- 11.30A.M to 01.30P.M.

Contact person:-

1.Mr.Vinod Sabharwal, 9312601414,President

Sh Gautam Arora has very kindly consented to provide and arrange for Tea,snacks and Lunch for the meeting . Mr VK Sabharwal has taken on the mantle of arranging the Hall .

News – Article on Philately – Dainik Jagran

News – Article on Philately – Dainik Jagran

An article on Philately in Delhi Edition of  leading Hindi Newspaper Dainik Jagran has been published in its Edition dated 28 Nov 2009. Our readers will appreciate the efforts being put in to Popularise the hobby among the People of all age groups and all walks of life.

A link is given below for the benefit of our readers.

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=2&edition=2009-11-28&pageno=20

जुनून से बना डाक टिकटों का अनमोल संग्रह
रणविजय सिंह, पश्चिमी दिल्ली हीरे की पहचान जौहरी ही कर सकता है यह कहावत यू हीं नहीं कही जाती। जिस डाक टिकट का इस्तेमाल करने के बाद कागज का टुकड़ा समझकर लोग फेंक देते हैं। देश के इतिहास, संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने वाले डाक टिकटों को सहेजना लोग उचित नहीं समझते। हकीकत में यह सस्ता होकर भी अनमोल है। यह बात डाक टिकटों का संग्रह करने का शौक रखने वाले राजौरी गार्डन के चार डाक टिकट संग्रहकर्ताओं से बेहतर कोई नहीं बता सकता। उन्होंने सदी पुराने, स्वतंत्रता के दिनों व दशकों पुराने डाक टिकटों का संग्रह किया है। पुराने दिनों में आने व रुपयों में बिकने वाले डाक टिकटों की कीमत हजारों व लाखों में हो चुकी है। डाक टिकटों पर प्रकाशित पुस्तक स्टेनले गिवन भी इस बात की तस्दीक करती है। दरअसल राजौरी गार्डनवासी विनोद सब्बरवाल, एएस बंगा व अन्य दो दोस्तों ने वर्षो पहले डाक टिकट शौकिया तौर पर संग्रह करना शुरू किया। बाद में ये डाक टिकट संग्रहकत्र्ता बन गए। उन्होंने बाकायदा पश्चिमी दिल्ली फिलाटेलिक क्लब बना लिया है। उन्होंने देश की स्वतंत्रता से पहले, स्वतंत्रता के बाद की डाक टिकट संजोकर रखे हैं, जो भारतीय इतिहास के अतीत के पन्नों को झकझोर कर रख देते हैं। जिसे देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि तब देश में रहन-सहन कैसी थी, यातायात के साधन क्या थे? देश की आजादी के बाद भारत सरकार ने 30 जनवरी, 1948 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर चार डाक टिकटों का एक सेट जारी किया था। उस वक्त ये टिकट क्रमश: डेढ़ आना, साढ़े तीन आना, 12 आना व दस रुपये में मिलता था। बकौल एस बंगा यह देश का पहला व एक मात्र डाक टिकट है, जो विदेश में छपा। इसे स्विटजरलैंड में छपवाया गया था। उन्होंने बताया कि आज 10 से 12 रुपये में टिकट को खरीदने को अनेक लोग तैयार हैं। बावजूद इसके बापू का यह डाक टिकट नहीं मिल रहा है। यही नहीं, देश स्वतंत्र होने के बाद जारी पहले डाक टिकट जयहिंद, अशोक स्तंभ, तिरंगा झंडा व उड़ान भरते विमान पर स्टांप जारी हुआ था। इस टिकट का भी संग्रह है, जो देश की आजादी की आज भी याद दिलाते हैं। वहीं, डाक टिकट संग्रहकर्ताओं को रोजी रोटी भी दे रहे हैं। पश्चिमी दिल्ली डाक टिकट संग्रह क्लब के अध्यक्ष विनोद सब्बरवाल व एएस बंगा ने बताया कि 1852 में पहला टिकट जारी हुआ था। तब आधा आना में बिकने वाला डाक टिकट की कीमत 50 हजार से लेकर नौ लाख रुपये हो चुकी है। इस अनोखे कार्य के लिए तीन मेडल जीत चुके विनोद सब्बरवाल ने कहा कि जिन डाक टिकटों की छपाई में खामियां होती हैं, उनकी कीमत और ऊंची होती है। यदि खामियां रंगों की हो तो एक टिकट की कीमत पांच लाख रुपये मिल जाता है। डाक टिकट संग्रह करने के शौकीन लोग कटे फटे व बीच से मुड़े हुए टिकट के लिए 40 हजार रुपये तक देने को तैयार रहते हैं क्योंकि इन टिकटों में देश की आत्मा बसती है।